निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
दिसंबर का महीना था। ठंड बढ़ने लगी थी और सूरज की रोशनी में भी ठंडक का एहसास हो रहा था। उस दिन शाम को मैं अपने कमरे में बैठकर कुछ काम कर रहा था। अचानक मेरी बेसब्री बढ़ने लगी। मुझे चाय की प्यास लग आई थी, और मैंने सोचा कि कुछ गर्मा-गर्म चाय बना ली जाए।
जैसे ही मैं किचन में पहुंचा, मुझे याद आया कि मेरी छोटी बहन, जो हमेशा अपने खाने में अलग-अलग स्वादों की मिठास और खटास का ध्यान रखती है, भी किचन में व्यस्त है। मैंने उसे चाय बनाने के लिए कहा और खुद से कहा, "वह जो खाता है, सो आप नहीं खा सकते।" इसका मतलब था कि उसकी पसंद और मेरी पसंद बहुत अलग थीं, लेकिन हम दोनों एक-दूसरे की पसंद का सम्मान करते थे।
चाय बनते-बनते मैं खिड़की की ओर देखा। बाहर सर्द हवा की तीव्रता का आभास हो रहा था। एक व्यक्ति बाहर खड़ा था और सोच रहा था, "कितना बाहर खड़ा है?" शायद वह किसी का इंतजार कर रहा था या फिर किसी से मिलना चाहता था।
चाय का प्याला हाथ में लेकर, मैं सोफे पर बैठ गया और अपनी नई पुस्तक पढ़ने लगा। यह पुस्तक 'देव जो महान है' पर आधारित थी। उसमें एक महान नेता की कहानी थी जिसने समाज के लिए बड़े काम किए थे। किताब की कहानी इतनी सहज और प्रेरणादायक थी कि मैं खो सा गया।
मेरा भाई भी वहीं पास में बैठा था और उसने मुझसे बातचीत शुरू की। उसने मुझे बताया कि कैसे इस महीने में उसने विभिन्न अनुभवों को संजोया था। माह का हर दिन उसने कुछ नया सीखा था और अपने जीवन में उसे अपनाया था।
हमारी बातचीत गहराती चली गई और हम अतीत की यादों में खोते चले गए। बातों ही बातों में चाय खत्म हो गई और हमें ध्यान ही नहीं रहा कि वक्त कैसे बीत गया। बाहर अंधेरा फैल चुका था, लेकिन हमारे दिलों में नई उम्मीद की रोशनी जगमगा रही थी।
यह शाम न केवल सर्दी की वजह से खास थी, बल्कि इसलिए भी कि हमने परिवार और मित्रता की अहमियत को और भी करीब से महसूस किया था। वह किताब, वह चाय, वह बातें—सब कुछ मिलकर उस शाम को अविस्मरणीय बना गए।
इस तरह से हमें महसूस हुआ कि जीवन के हर पल में मिठास होनी चाहिए, खटास भी साथ-साथ रहे, और हर घूंट में हमें प्यास का एहसास बना रहे, ताकि हम जीवन के हर अनुभव को पूरी तीव्रता के साथ जी सकें।