निर्देशः - निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों का सही विकल्प चुनिए
साहित्य किसी देश के महान व्यक्तियों के महान विचारों का समूह होता है। साहित्य की महत्ता व्यक्ति की महत्ता पर निर्भर है और साधना के बिना कोई महान हो नहीं सकता। तुलसीदास, रवीन्द्रनाथ या गाँधी ने जो कुछ दिया है, उससे किसी को असहमति हो सकती है; किंतु उनकी तथा उनके विचारों की महत्ता में किसी को सन्देह नहीं हो सकता। उनका साहित्य देश और काल की परिधि को पार कर विश्व साहित्य के सिंहासन पर जा बैठा है। वह साहित्य साधना के बिना संभव नहीं था। साधना का अर्थ यह न लगाया जाए कि हिमालय की हिमाच्छादित गुफा में बैठकर अथवा किसी नन्दन वन में प्रातः काल से सायंकाल तक शीर्षासन करते हुए प्राप्त होने वाली कोई वस्तु है। साहित्यिक साधना अध्ययन, मनन, विवेकाविवेक पर आधारित है। अपरिपक्व विचार तथा बिना अध्ययन और मनन के निर्मित रचना उस कविता की भाँति है जिस पर कवि सम्मेलन में सुनकर लोग खुब तालियाँ पीटते हैं, किन्तु छपने पर वह नीरस, निरर्थक तथा भद्दी दिखायी पड़ती है। इस जन-जागरण के युग में हमारा साहित्य जनता और जीवन से अलग नहीं होना चाहिए और नवीन श्रेयस्कर विचारों का समावेश उसमें होना आवश्यक है; किन्तु यह अपनी प्राचीन स्वस्थ परम्पराओं की रक्षा, अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान तथा भक्ति के लिए होना चाहिए।