निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यान से पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तरों का सही विकल्प चुनिए:
हम सब की मिली-जुली ज़िंदगी में कला के रूपों का ख़ज़ाना हर तरह बेहिसाब बिखरा चला गया है। सुंदरता का अवतार हमारे सामने पल-छिन होता रहता है। अब यह हम पर है, ख़ासतौर से कवियों पर, कि हम अपने सामने और चारों ओर की इस अनन्त और अपार लीला को कितना अपने अंदर बुला सकते हैं। इसका सीधा-सादा मतलब हुआ अपने चारों तरफ़ की ज़िंदगी में दिलचस्पी लेना, उसको ठीक-ठीक यानी वैज्ञानिक आधार पर समझना और अनुभूति और अपने अनुभव को इसी समझ और जानकारी से सुलझाकर स्पष्ट करके, पुष्ट करके अपनी कला-भावना को जगाना। यह आधार इस युग के हर सच्चे और ईमानदार कलाकार के लिए बेहद ज़रूरी है। इस तरह अपनी कला-चेतना को जगाना और उसकी मदद से जीवन की सच्चाई और सौंदर्य को अपनी कला में सजीव से सजीव रूप देते जाना : इसी को मैं 'साधना' समझता हूँ, और इसी में कलाकार का संघर्ष छिपा हुआ देखता हूँ। कला में भावनाओं की तराश-खराश, चमक, तेज़ी और गर्मी सब उसी से पैदा होंगी, उसी 'संघर्ष' और 'साधना' से, जिसमें अन्तर-बाह्य दोनों का मेल है। कला के इस सौंदर्य और उससे मिलने वाले आनंद के शत्रु वे जहाँ और जिस भेष में भी होंगे, जो भी होंगे-परिस्थितियाँ, व्यक्ति या दल-हर ईमानदार कलाकार के शत्रु होंगे।
कला जीवन का सच्चा दर्पण है। और आज के सभी देशों के जीवन में कायापलट तेज़ी के साथ आ रही है; क्योंकि आज किसको नहीं दिखाई दे रहा है कि यह क्रान्ति का युग है। थके हुए पुराने कलाकारों की आहों को भी उससे चमक मिलती है। नयों की तो वह काव्य सामग्री ही है ; क्योंकि वही उनके और उनके आगे की पीढ़ियों के लिए नये, उन्मुक्त, सुखी, आदर्श जीवन की नींव डालनेवाला है।