निर्देशः निम्नांकित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-
अनन्त रुपों में प्रकृति हमारे सामने आती है- कहीं मधुर, सुसज्जित या सुन्दर रुप में; कहीं रुखे बेडौल या कर्कश रुप में; कहीं भव्य, विशाल या विचित्र रुप में; रबीं उग्र, कराल या भयंकर रुप में। सच्चे कवि का हृदय उसके इन सब रुपों में लीन होता है, क्योंकि उसके अनुराग का कारण अपना खास सुख भोग नहीं, बल्कि चिर साहचर्य द्वारा प्रतिष्ठित वासना है जो केवल प्रफुल्ल प्रसून प्रसाद के सौरभ संचार, मकरंद लोलुप मधुप-गुञ्जार, कोकिल-कूजित निकुञ्ज और शीतल सुख-स्पर्श समीर इत्यादि की चर्चा किया करते हैं, वे विषयी या भोगलिप्सु हैं। इसी प्रकार जो केवल मुक्ताभास हिमबिन्दु मण्डित मरकताभ-शाद्वल-जाल, अत्यन्त विशाल गिरि शिखऱ से गिरते हुए जलप्रपात के गम्भीर गर्त से उठी हुई सीकर-नीहारिका के बीच विविधवर्ण स्फुरण की विशालता, भव्यता और विचित्रता में ही अपने हृदय के लिए कुछ पाते है, वे तमाशबीन हैं- सच्चे भावुक या सहृदय नहीं।