Comprehension Passage
प्रातः नभ था नीला शंख जैसे,
भोर का नभ,
राख से लीपा हुआ चौका,
अभी गीला पड़ा है,
बहुत काली सिल जरा से लाल केसर हो,
कि जैसे धुल गयी हो,
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक,
मल दी हो किसी ने,
भोर का नभ,
राख से लीपा हुआ चौका,
अभी गीला पड़ा है,
बहुत काली सिल जरा से लाल केसर हो,
कि जैसे धुल गयी हो,
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक,
मल दी हो किसी ने,
प्रस्तुत कविता का भाव सौन्दर्य है -
1
नए उपमानो का चित्रण
2
प्रातः कालीन परिवेश का चित्रण
3
सूर्य की लालिमा का चित्रण
4
इनमे से से कोई नही