Comprehension Passage
भारत जैसे देश के लिए सहकारिता की पद्धति को अपनाना विशेष रूप से आवश्यक है। इसका कारण यह है कि भारत में छोटे किसानों तथा व्यापारियों की संख्या ही अधिक है। ये लोग निर्धनता तथा व्यवस्था के चक्र में बुरी तरह से फँसे हुए हैं। सहकारिता ही इनकी शक्तियों को एक सूत्र में पिरो कर उनका उद्धार कर सकती है। कृषि के क्षेत्र में तो सहकारिता की पद्धति विशेष रूप से उपयोगी है। इसकी सहायता से खेतों को बड़ा किया जा सकता है तथा क्रय-विक्रय का समुचित प्रबंध हो सकता है। गृह उद्योगों के विकास के लिए भी सहकारिता की पद्धति बहुत लाभकारी है। बैंक, व्यापार तथा यातायात के क्षेत्र में भी सहकारिता के आधार पर संगठन किया जा सकता है। सहकारिता के सिद्धांतों की इन विशेषताओं को दृष्टि में रखकर ही हमारी पंचवर्षीय योजनाओं में सहकारिता को बहुत ऊँचा स्थान दिया गया है। योजना आयोग का यह विचार है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता का अधिकाधिक उपयोग किया जाना चाहिए।

योजना आयोग के अनुसार सहकारिता का अधिकाधिक उपयोग किया जाना चाहिए -

1
कृषकों की दशा सुधारने में
2
योजना के विभिन्न क्षेत्रों में
3
अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में
4
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में

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