Comprehension Passage
निर्देश: घनन घनन बज उठी गरज तत्क्षण रण-भेरी।
काँप उठा आकाश, चौंक कर जगती जागी,
छिपी क्षितिज में कहीं, सभय निद्रा उठ भागी।
बोले वन में मोर, नगर में डोले नागर,
करने लगे तरंग भंग सौ-सौ स्वर-सागर।
उपर्युक्त पद्यांश का विचार सौंदर्य है
1
विचारों की उच्चता
2
वीरभाव के परिणाम स्वरुप निर्मित परिदृश्य
3
युद्ध में जनसाधारण का चित्रण
4
उपर्युक्त सभी