Comprehension Passage
जहाँ लोकधर्म और व्यक्ति धर्म का विरोध हो, वहां कर्ममार्गी गृहस्थ के लिए लोकधर्म अवलम्बन श्रेष्ठ हैI यदि किसी अत्याचारी का दमन सीधे न्यायसंगत उपाय से नहीं हो सकता तो कुटिल नीति का अवलंबन लोकधर्म की दृष्टि से उचित है I किसी अत्याचारी को जो हानि पहुँच रही है उसके सामने वह हानि कुछ भी नहीं है जो किसी व्यक्ति के बुरे दृष्टान्त से होगी I लक्ष्य यदि व्यापक और श्रेष्ठ है तो साधन का अनिवार्य अनौचित्य उतना खुल नहीं सकता I भारतीय जन समाज में लोकधर्म का यह आदर्श पूर्ण रूप से प्रतिष्ठित रहने पाता तो विदेशियों के आक्रमण को व्यर्थ करने में देश अधिक समर्थ होता I
प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त निष्कर्ष क्या हो सकता है?
1
लोकधर्म का औचित्य
2
लोकधर्म की उपयोगिता
3
लोकधर्म और विदेशी आक्रमण
4
लोकधर्म को प्रतिष्ठित होना चाहिए