बाइबिल और दूसरे पावन ग्रंथों में नूह नाम के एक पैगम्बर का जिक्र मिलता है। उनका असली नाम लश्कर था। लेकिन अरब ने उनको नूह के लकब से याद किया है। वह इसलिए कि आप जिंदगी भर रोते रहे। इसका कारण एक जख्मी कुत्ता था। नूह के सामने से एक बार एक घायल कुत्ता गुजरा। नूह ने उसे दुत्कारते हुए कहा- 'दूर हो जा गंदे कुत्ते!' इस्लाम में कुत्तों को गन्दा समझा जाता है। कुत्ते ने उनकी दुत्कार सुनकर जवाब दिया- 'न मैं अपनी मर्जी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी पसंद से इंसान हो। बनाने वाला सबको तो एक ही है।
मट्टी से मट्टी मिले
खो के सभी निशान।
किसमें कितना कौन है,
कैसे हो पहचान।।
नूह ने जब ये बात सुनी और दुखी हो मुद्दत तक रोते रहे। महाभारत में युधिष्ठिर का जो अंत तक साथ निभाता नजर आता है, वह भी प्रतीकात्मक रूप में एक कुत्ता ही था। सब साथ छोड़ते गए तो केवल वही उनके एकांत को शांत कर रहा था।
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्न का उत्तर बताइये: