Comprehension Passage

एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।

भारत में श्रम-कल्याण कार्यों में अनेक सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं का योग है। भारत में श्रमिकों के कल्याण-कार्य से सम्बन्धित भावना का विकास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था। श्रम संसार में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण साधन है। श्रम करके हम अपने जीवन में ऊँची-से-ऊँची आकांक्षा को पूरी कर सकते है। संसार कर्म क्षेत्र है अतः यहाँ कर्म करना ही हम सबका धर्म है। किसी कार्य में सफलता तभी मिलती है जब हम परिश्रम करते है। श्रम ही जीवन को गति प्रदान करता है। चींटी को श्रमजीवी कहा जाता है। कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के कल्याण, उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न पहलुओं को नियमित करने का दायित्व सरकार अपने ऊपर लेती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने कारखाना अधिनियम, 1948 प्रतिपादित किया। औद्योगिक कल्याण के सम्बन्ध में कार्य की प्रेरणा एवं औचित्य सम्बन्धी विभिन्न विचारधाराओं की श्रृंखला ही उपलब्ध है। कुछ लोग श्रम-कल्याण कार्य को कारखानों के अन्तर्गत किए जाने वाले कार्यों तक सीमित बताते है। अपनी दिशा में, हम श्रम-कार्यों के अन्तर्गत श्रमिकों के बौद्धिक, शारीरिक, नैतिक और आर्थिक उन्नति के लिए किए गए किसी भी कार्य को सम्मिलित करने को प्राथमिकता देते हैं। श्रम-कल्याण से तात्पर्य विद्यमान औद्योगिक प्रणाली तथा अपनी फैक्ट्रियों में रोजगार की दशाओं का उन्नत करने के लिए मालिकों द्वारा किये जाने वाले ऐच्छिक प्रयासों से है। श्रम-कल्याण कार्यों का परिणाम यह होता है कि इससे श्रमिकों में उत्तरदायित्व की भावना का विकास होता है। इससे वे कार्यों में विशेष रुचि लेते हैं।

संसार में सफलता प्राप्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन क्या हैं?

1
श्रम
2
उन्नति
3
धर्म
4
विचारधारा

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