भारतवर्ष कथा की जन्मभूमि है, यह कहानी का आदि देश है। मनुष्य ने जिस क्षण इस देश की धरती पर पहली बार पाँव रखा होगा, कदाचित् उसी समय से कहानी का भी प्रचलन हमारे यहाँ हुआ होगा। ऋग्वेद विश्व-साहित्य का प्राचीनतम ग्रन्थ है, जिसकी रचना ईसा से कुछ हजार वर्ष पहले हो चुकी थी। ऋग्वेद में अनेक स्थलों पर तत्कालीन समाज में कहानी या किस्सागोई की लोकप्रियता और एक प्रचलित विधा होने के प्रमाण मिलते हैं। इन्द्र उस समय का एक महानायक था। इन्द्र को लेकर ही ऋग्वैदिक समाज में अनेक मिथक या किंवदन्तियाँ गढ़ी जा चुकी थीं। कहानी इन मिथकों और कथाओं में अन्तर्गर्भित थी। इन्द्र की चरितगाथा अपने आप में एक औपन्यासिक विस्तार को समेटे हुए कहानी का ढाँचा सामने रखती है। इस दृष्टि से ऋग्वेद (1/32) का यह अंश पठनीय है:
"मैं इन्द्र के पराक्रमों का वर्णन करता हूँ, जिन्हें उस वज्रधारी ने सबसे पहले किया है। उसने अहि (नामक असुर) को मारा, जल की धारा को प्रवाहित किया और पर्वत पर नदियों के लिए रास्ता खोला। इन्द्र ने उस अहि को मार गिराया, जो पर्वत पर रहता था। त्वष्टा ने इन्द्र के लिए वज्र बनाया था। (इन्द्र ने जैसे ही नदियों का रास्ता खोला,) रँभाती हई गायों की तरह जल नीचे की ओर बह चला। उसने अपने बल को प्रखर करने के लिए सोमपान किया और वज्र से अहि पर प्रहार किया। इन्द्र ने मायावियों की माया का विरोध किया। उसने सूर्य, उषा और आकाश को अनावृत किया। इसके पश्चात् इन्द्र का कोई शत्रु न रहा। इन्द्र ने वृत्र के अंगों को ऐसे काट डाला, जैसे पेड़ की डालियाँ काटी जाती हैं। वृत्र धरती पर गिर पड़ा। मद्यपान करके वृत्र वीर इन्द्र से लड़ने चला था। इन्द्र सोमपायी है, उसने अनेक शत्रुओं का दमन किया है। वृत्र इन्द्र के प्रहारों को कैसे सह सकता था? वह बुरी तरह से हारा। पर हाथ और पाँव कट जाने पर भी उसने इन्द्र से लड़ाई जारी रखी। इन्द्र ने उसकी पीठ पर वज्र से प्रहार किया। (साधारण) बैल भला साँड के मुकाबले में ठहर सकता है? वृत्र के टुकड़े-टुकड़े हो गये। तब जल का प्रवाह लोगों की प्यास बुझाने के लिए वृत्र के ऊपर से बह उठा। वृत्र ने जल की धारा को जबरदस्ती रोक रखा था। अब वही जल उसे रौंदता हुआ बह रहा था। इन्द्र ने वत्र की शक्तिहीन माता पर भी प्रहार किया। माता ऊपर थी, वत्र नीचे पड़ा था। वत्र की माता ऐसे पड़ी थी, जैसे गाय अपने बछड़े के साथ पड़ी हो। वृत्र का मृत शरीर उस जल-धारा में पड़ा था, जो रुकना नहीं जानती, विश्राम नहीं करती। इसी दास के बस में होकर तो जल अभी तक रुका हुआ था। अहि उसका रक्षक था। जैसे पणि गायों को रोक लेते हैं, वैसे ही उसने जल की धाराओं को रोक रखा था।
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्न का उत्तर बताइए।