दिए गए गद्यांश को ध्यानपूरक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों क उत्तर दें।
भारत की विदेश नीति हमेशा शांति की रही है। उसकी नीयत में कहीं खोट नहीं है। उसने कभी किसी का छीना नहीं। कभी किसी का माल दबाया नहीं। वह शांति के गीत गाता रहा। उसकी संस्कृति में समन्वय तथा नए उपकरणों को पचाकर आत्मसात करने की अद्भुत क्षमता है। भारत उस सिद्धांत से परिचालित है, जिसमें विश्व के समस्त राष्ट्रों और पंथों को परस्पर मिल-जुलकर रहने की स्वतंत्रता है। इसने जब भी गाया है, जीवन का राग ही गाया है। अमरता को ही सराहा है। इसने ऐसे रास्तों को अपनाया ही नहीं, जो बंद गली के छोर बन जाते हों। सुग्रीव को बाली से मुक्त कराकर पंपापुर का राज्य सुग्रीव को ही सौंपा है। लंका विजय के बाद विभीषण को सारा-सब दे दिया। इसने कलिंग की युद्ध भूमि में तलवार त्यागी हैं, लेकिन हारकर नहीं, जीतकर। ताशकंद समझौते में जीती हुई जमीन लौटाई है। बांग्लादेश को स्वतंत्र होने में मदद की और उससे एक कौड़ी की चाहना न रखते हुए, उसे स्वतंत्र राष्ट्र बना दिया। शौर्य, धैर्य और शील के पहियोंवाली मोटर पर सवार होकर इसी भारत ने शांति और सौहार्द्र के गीत लिखना चाहे हैं। इसके पास वीरता और विजय से भरी बहुत गाथाएँ हैं। भारत के अमर शहीदों और वीर सपूतों को सौ-सौ नमन।