Comprehension Passage

निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उतर दीजिये –

मेरा देशप्रेम कोई बहिष्‍कारशील वस्‍तु नहीं बल्कि अतिशय व्‍यापक वस्‍तु है और मैं उस देशप्रेम को वर्ज्‍य मानता हूँ जो दूसरे राष्‍ट्रों को तकलीफ देकर या उनका शोषण करके अपने देश को उठाना चाहता है। देशप्रेम की मेरी कल्‍पना यह है कि वह हमेशा, बिना किसी अपवाद के हर एक स्थिति में, मानव-जाति के विशालतम हित के साथ सुसंगत होना चाहिए। यदि ऐसा न हो तो देशप्रेम की कोई कीमत नहीं इतना ही नहीं, मेरे धर्म और उस धर्म से ही प्रसूत मेरे देशप्रेम के दायरे में प्राणियों का समावेश होता है। मैं न केवल मनुष्‍य नाम से पहचाने जाने वाले प्राणियों के साथ भ्रातृत्‍व और एकात्‍मता सिद्ध करना चाहता हूँ, बल्कि समस्‍त प्राणियों के साथ-रेंगने वाले साँप आदि जैसे प्राणियों साथ भी-उसी एकात्‍मता का अनुभव करना चाहता हूँ। कारण, हम सब उसी एक सृष्‍टा की संतति होने का दावा करते हैं और इसलिए सब प्राणी, उनका रूप कुछ भी हो, मूल में एक ही हैं। हमारा राष्‍ट्रवाद दूसरे देशों के लिए संकट का कारण नहीं हो सकता क्‍योंकि जिस तरह हम किसी को अपना शोषण नहीं करने देंगे, उसी तरह हम भी किसी का शोषण नहीं करेंगे। स्‍वराज्‍य के द्वारा हम सारी मानव-जाति की सेवा करेंगे।

प्रस्तुत गद्यांश में किसकी संतति होने का दावा करने की बात की जा रही है? 

1
सृष्‍टा
2
प्रकृति 
3
धरती 
4
आकाश 

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