Comprehension Passage

दिये गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिये गए प्रश्नों का उत्तर दीजिये।

राम की रावण के ऊपर विजय उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितनी राम की प्रजा के मनोविज्ञान के ऊपर यह विजय। राम का वैयक्तिक जीवन अपनी प्राण-सहचरी के प्रति इस गंभीर-स्नेह-भावना से सर्वथा परिप्लावित है और वे सामाजिक समरसता के प्रतीक तो चाहें बाद में बनें, वैयक्तिक समरसता के तो वे मूर्तिमान उदाहरण हैं। संभवतः लोक से अधिक वे व्यक्ति में ही सफल हुए हैं जब कि भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तिगत संबंध किसी से है ही नहीं, जिनकी इंद्रियों को शतसहस्त्र रमणियों की कुहक विमथित नहीं कर सकी थी, जिन्हें पुत्र पौत्रादि का सुख एक क्षण भी खींच नहीं सका, जिन्हें स्वजनों का विनाश भी लोकहित के लिए अभीष्ट हो गया था और जिन्हें जीवन भर विराट विरक्ति बनी रही अपने व्यक्तित्व के प्रति। पर हाय री विडंबने, वे कृष्ण प्रेम के आराध्य देवता हो गए, वे जादूवाले कन्हैया हो गए और कामुकता के लिए एक सुलभ आलंबन।

राम की लोकप्रियता का श्रेय लोक रंजन को आज तक भले ही दिया जाता रहा हो, पर मेरी दृष्टि में यह श्रेय उनकी व्यक्ति की पूर्णतया को अधिक देना चाहिए। राम लोक- हृदय पर विजयी हुए हैं इसलिए कि वे अपने ऊपर विजयी हैं, कृष्ण अपने ऊपर विजयी आपातत: हैं, इसे उन्होंने साधन बनाया है अपने लोक-विजय के लिए दोनों के महान चरित्रों का यही विश्लेषण है और दोनों के आदर्श पृथक-पृथक क्षेत्रों में हैं, इसे एक दूसरे के साथ मिलाना नहीं चाहिए।

राम लोक- हृदय पर क्यों विजयी हुए हैं?

1
इसलिए की वे प्रजा को महत्व देते थे।
2
इसलिए कि वे अपने ऊपर विजयी हैं।
3
इसलिए कि लोक से अधिक वे व्यक्ति में ही सफल हुए हैं।
4
इसलिए के उन्होंने रावण को पराजित किया था।

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