नीचे दिए गये गद्यांश के बाद 5 प्रश्न दिए गये हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर चुनें।
महापुरुष लोग जब आते हैं हम अच्छी तरह नहीं पहचान पाते, क्योंकि हमारा मन भीरू और अस्वच्छ है। हमारे मन में वह क्षमता नहीं है जिससे हम महानता को पूरी तरह समझ सकें। जो महापुरुष प्रेम देकर अपना परिचय देते हैं, उनको हम उनके प्रेम से किसी सीमा तक समझ भी सकते हैं। हम लोग समझ गए हैं कि, " गांधी जी हमारे हैं।" उनके प्रेम में ऊंच-नीच, मूर्ख और विद्वान, अमीर और गरीब का भेद नहीं है। उन्होंने अपना प्रेम सभी को समान रूप से वितरित किया है। उन्होंने जो भी कहा है वह केवल बातों से नहीं कहा है अपितु दुःख की वेदना से कहा है। उनका धैर्य देखकर, ममता देखकर, उनका संकल्प सिद्ध हो गया है, और किसी जोर जबरदस्ती से नहीं अपितु त्याग द्वारा, दुःख द्वारा, तपस्या द्वारा वह अपने संकल्प में सफल हुए।