"या अनुरागी चित्त की, गति समझै नहीं कोय।
ज्यों ज्यों बूडै स्याम रंग, त्यों त्यों उज्ज्वल होय।।"
इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है?
1
भ्रांतिमान
2
उत्प्रेक्षा
3
विरोधाभास
4
उपमा
"या अनुरागी चित्त की, गति समझै नहीं कोय।
ज्यों ज्यों बूडै स्याम रंग, त्यों त्यों उज्ज्वल होय।।"
इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है?