'सृष्टि दृष्टि के अंजन रंजन, ताप विभंजन, बरसो।
व्यग्र उदग्र जगज्जननी के, अभि अग्रस्तन, बरसो।'
उपर्युक्त काव्य पंक्ति में कौन - सा काव्य दोष है?
1
ग्राम्यत्व
2
निरर्थकत्व
3
अपुष्टत्व
4
श्रुतिकटुत्व
'सृष्टि दृष्टि के अंजन रंजन, ताप विभंजन, बरसो।
व्यग्र उदग्र जगज्जननी के, अभि अग्रस्तन, बरसो।'
उपर्युक्त काव्य पंक्ति में कौन - सा काव्य दोष है?