"मेरे नैन बिरह की बेल बई।
सींचत नैन नीर के, सजनी! मूल पातर गई।।"
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ अष्टछाप के किस कवि की हैं ?
1
सूरदास
2
नंददास
3
कृष्णदास
4
छीत स्वामी
"मेरे नैन बिरह की बेल बई।
सींचत नैन नीर के, सजनी! मूल पातर गई।।"
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ अष्टछाप के किस कवि की हैं ?