Comprehension Passage

निर्देशः नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

रामचंद्र शुक्ल के निबंध पं महावीरप्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित सरस्वती में छपने लगे थे। उन्होंने निबंध में प्रस्तुत सूत्रों की उपमा पत्ते की नसों से दी है, जो परस्पर गूँथी होती हैं। शुक्ल जी के अधिकांश प्रसिद्ध निबंध मनोविकारों पर हैं। उन्होंने भारतेंदु, प्रेमघन, फ्रेडरिक पिन्काट पर भी लिखा है, लेकिन वे या तो व्यक्तित्व कृतित्व का परिचय देने वाले हैं, या संस्मरण या जीवनी परक। निबंधकार के रूप में शुक्ल जी का योगदान मनोविकार संबंधी निबंधों के कारण है। इन निबंधों का संग्रह पहले विचार-वीथी के नाम से 1930 ई. में प्रकाशित हुआ था। बाद में चिंतामणि (पहला भाग) नाम से 1939 ई. में परिवर्धित और संशोधित संस्करण प्रकाशित हुआ।

'मनोविकार' का उचित संधि विच्छेद है -

1
मनु + विकार
2
मनो + विकार
3
मन + विकार
4
मन: + विकार

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