Comprehension Passage

सौरभ फैला विपुल धूप बन,

मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन;

दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,

तेरे जीवन का अणु गल गल!

पुलक पुलक मेरे दीपक जल!

तारे शीतल कोमल नूतन,

मांग रहे तुझसे ज्वाला-कण

विश्व-शलभ सिर धुन कहता 'मैं

हाय न जल पाया तुझ में मिल'!

सिहर सिहर मेरे दीपक जल!

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर बताइए:

'तेरे जीवन का अणु गल गल' पंक्ति का भाव है? 

1
जाग-जाने की इच्छा
2
जीने की इच्छा
3
जीवन को बलिदान कर देने की इच्छा
4
उजाला करने की इच्छा

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