'बन्दऊ गुरु पद कंज, कृपासिंधु नररूप हरि ।
महामोह तमपुंज जासु वचन रविकर निकर ।।'
उक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं?
1
सूरदास
2
तुलसीदास
3
केशवदास
4
कुंभनदास
'बन्दऊ गुरु पद कंज, कृपासिंधु नररूप हरि ।
महामोह तमपुंज जासु वचन रविकर निकर ।।'
उक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं?