नीचे दिये गए गदयांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भोजपत्र हिमालय प्रदेश में पैदा होने वाले 'भूर्ज' नामक वृक्ष की छाल है। इनकी ऊँचाई कभी-कभी 60 फुट तक जाती है। हिमालय में साधारणतः14000 फुट की ऊँचाई पर ये बहुतायत से पाए जाते हैं। इनकी छाल कागज की भांति होती है। इस छाल को लेखक लोग अपनी इच्छानुसारलंबाई-चौड़ाई को काट-कर उस पर स्याही से लिखते थे। अब तो यहकेवल तंत्र-मंत्र के काम ही आता है, पर किसी जमाने में कश्मीर तथा हिमालय प्रदेशों में भूर्जपत्र पर ही पोथियाँ लिखी जाती थीं। अधिकतर भूर्जपत्र की पुस्तकें कश्मीर से ही मिलती हैं। भोजपत्र की सबसे पुरानी पुस्तक खरोष्ठी लिपि में लिखा हुआ प्राकृत (पालीवाला नहीं) 'धम्मपद' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ है, जो संभवत: ईसवी सन की तीसरी शताब्दी का है। सबसे पुरानी संस्कृत-पुस्तक जो भोजपत्र पर लिखी मिली है, वह 'संयुक्तागम सूत्र' है। खरोष्ठीवाली पुस्तक का काल निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। यह खोतान से प्राप्त हुई थी।