दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए ।
हृष्ट-पुष्ट रहने के लिए पौष्टिक आहार का अपना पृथक ही महत्व है। हमारा आहार आदर्श पथ्याहार होना चाहिए जो दीर्घायु के लिए चार महत्वपूर्ण सद्गुण प्रदान करता है। ऐसे आहार से शक्तिशाली पाचक रसों का उत्पादन होता है। उसके ग्रहण करने से एक धीमी एवं तालबद्ध हृदयगति बनी रहती है। यह शरीर में अच्छे निष्कासन में सहायता करता है। इसके सेवन से सदैव प्रसन्नचित्त प्रवृत्ति बनी रहती है। जीवन का एक सिद्धांत है कि आजीवन संतुलित आहार ग्रहण करना चाहिए। यह शरीर को सर्वोच्च अवस्था में रखता है। यह मस्तिष्क को प्रसन्नचित्त एवं जीवन के प्रति धनात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने में भी मदद करता है। हमें अपनी आयु के ऊपर ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य का किसी भी आयु में फिर से निर्माण किया जा सकता है।