'पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं।'
प्रस्तुत पंक्तियों के रचयिता हैं:
1
सुमित्रानन्दन पंत
2
शमशेर बहादुर सिंह
3
नागार्जुन
4
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
'पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं।'
प्रस्तुत पंक्तियों के रचयिता हैं: