आदिकालीन काव्यग्रंथों में कथा कहने की पंरपरा को लक्ष्य करके 'पृथ्वीराज रासो' के संदर्भ में किस आलोचक ने लिखा है- "कथा की परीक्षा इतिहास की दृष्टि से नहीं, काव्य की दृष्टि से होनी चाहिए। पुरानी कथाएँ काव्य ही अधिक हैं, इतिहास वे एकदम नहीं हैं।"
1
मुनि जिनविजय
2
राहुल सांकृत्यायन
3
हजारीप्रसाद द्विवेदी
4
विश्वनाथ प्रसाद मिश्र