Comprehension Passage
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए सवालों का जवाब दीजिए।
महाभारत में कहा गया है कि अहिंसा परमोधर्मस्तथाअहिंसापरं तजः अहिंसा परमंसत्यंयतो घर्म: प्रवर्तते। अर्थात अहिंसा ही परम धर्म है, अहिंसा ही श्रेष्ठ तप है, और अहिंसा ही सत्य है, क्योंकि उसी धर्म में मन लगता है। संसार में जितने भी जीव हैं, हमें जाने - अनजाने में किसी की हत्या नहीं करनी चाहिए। हमारे समान ही जीवों में भी एक ही आत्मा विद्यमान है। सभी जीव हमारी तरह अपने प्राणों से प्यार करते हैं। इसलिए किसी से बैर न करें। सच्चा, संयमशील पुरुष वही है, जो मन, वचन और शरीर से किसी की हिंसा नहीं करता, सब जीवों के प्रति अहिंसा की भावनाएँ रखता है। प्राणियों की हिंसा करना कोई धर्म नहीं है, जो कभी किसीकी हिंसा नहीं करता, वही सच्चा धर्मनिष्ठ है।
अहिंसा क्या है?
1
जाने आनजाने में घृणा करना
2
प्रेम और बैर भाव रखना
3
धर्म - अधर्म का तत्व
4
परम धर्म, तप, सत्य