माता की छाती का अमृतमय पय कालकूट हो जाए,
आँखों का पानी सूखे, हाँ, वह ख़ून की घूँट हो जाए;

एक ओर कायरता काँपे, गतानुगति विगलित हो जाए,
अंधे मूढ़ विचारों की वह अचल शिला विचलित हो जाए;

और दूसरी ओर कँपा देनेवाला गर्जन उठ धाए,
अंतरिक्ष में एक उसी नाशक तर्जन की ध्वनि मँडराए;

कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए!

उपरोक्त पंक्तियों में कवि सामाजिक परिवर्तन के लिए किस प्रकार की भावना और प्रेरणा को व्यक्त कर रहे हैं?

1
कवि शांतिपूर्ण और प्रेमपूर्ण परिवर्तन की बात कर रहे हैं, जिसमें सभी लोग एकजुट होकर समाज को बदलें।
2
कवि क्रांतिकारी और उग्र परिवर्तन की माँग कर रहे हैं, जिसमें कायरता, रूढ़ियों और अंधविश्वासों को तोड़ने के लिए तीव्र प्रतिरोध और क्रोध की आवश्यकता है।
3
कवि व्यक्तिगत सुख और समृद्धि के लिए प्रेरणा दे रहे हैं, जिसमें सामाजिक परिवर्तन की कोई बात नहीं है।
4
कवि परंपराओं और पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं, ताकि समाज में स्थिरता बनी रहे।

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