'त्यागपत्र' में प्रमोद के चरित्र से मेल नहीं खाने वाला कथन है-
1
उसके चिन्तन की परिणति आत्मविसर्जन में होती है।
2
समाज की विषमताओं को देखकर उनके बारे में सोचता है।
3
समाधान की तलाश में बेचैन रहता है।
4
आत्मालोचन के माध्यम से सभ्य समाज की विसंगतियों को ढकने का प्रयत्न करता है।