"मुक्त भोग आत्मा के विकास में बाधक नहीं होता। विवाह तो आत्मा को और जीवन को पिंजरे में बंद कर देता है।"

उपर्युक्त कथन 'गोदान' उपन्यास में  किसका है?

1
मिस्टर मेहता 
2
रायसाहब 
3
मालती 
4
मिर्जा खुर्शेद 

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