"रुपए हों तो न हुक्का-पानी का काम है, न जात-बिरादरी का। दुनिया पैसे की है, हुक्का-पानी कोई नहीं पूछता।"
उपर्युक्त कथन 'गोदान' उपन्यास में किसका है?
1
गोबर
2
झुनीया
3
होरी
4
झिंगुरी
"रुपए हों तो न हुक्का-पानी का काम है, न जात-बिरादरी का। दुनिया पैसे की है, हुक्का-पानी कोई नहीं पूछता।"
उपर्युक्त कथन 'गोदान' उपन्यास में किसका है?