Teaching MPPSC Assistant Professor Mock Test Series 2025 हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
"यहाँ मैं यात्रांत पर खड़ा हो कर निहारता हूँ कि यात्रा कहाँ से आरंभ होती है और गुरल कांकड़ की ही तरह पैर साधता हुआ फिर चल पड़ता हूँ- क्योंकि डगर जहां चुकती है, यात्रा वहाँ आरंभ होती है।'
उपर्युक्त कथन किस रचना का है?
1
मेरी तिब्बत यात्रा
2
आवारा मसीहा
3
अरे यायावर रहेगा याद
4
संस्कृति के चार अध्याय