दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
गिजुभाई की शिक्षा पद्धति के केन्द्र में निर्विवाद रूप से बालक था, और उनका सम्पूर्ण चिन्तन व आयोजन उसी के इर्द-गिर्द रहा था, पर वे इस महत्वपूर्ण तथ्य को नहीं भूले कि बालक के शिक्षण से पूर्व माता-पिता का शिक्षण भी कम आवश्यक नहीं। शालाएँ जिस नीति को लेकर शिक्षण-प्रक्रिया का आयोजन करती हैं, माता-पिता को भी उसकी जानकारी होनी जरूरी है, साथ ही वे बालक के साथ व्यवहार में उस लीक से कहीं अलग न चले जाएँ, जो शालाओं ने बाल विकास और बाल-शिक्षण के निमित्त रेखांकित की है। उनके बाल-शिक्षण के महत्वपूर्ण पक्ष हैं: बालक की इच्छा, उसका आनन्द, उसकी आजादी, उसका कर्तृव्य और क्रियाशीलता। गिजुभाई घर में बालक की रूचियों को महत्व देने, उस पर अपनी इच्छाएँ-आज्ञाएँ न थोपने, उसे स्वयं काम करने देने, उसके विकास हेतु घर में विविध सर्जनात्मक प्रवृत्तियाँ उपलब्ध कराने आदि के सुझाव देते हुए अभिभावकों से विशेष अपेक्षाएँ व्यक्त करते हैं कि बालक को स्वतंत्र-चेता बनाने के लिए घर में खुलेपन का माहौल दें। बालक को स्वतन्त्रता देने के पक्षधर गिजुभाई माता-पिता को स्वतन्त्रता और निरंकुशता का सूक्ष्म अन्तर भी समझाते है।