निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
ज्ञान की धारा, एक ऐसी अमूल्य संपदा है जो मानव जीवन को समृद्ध और संरचित करती है। यह धारा समय, स्थान, और सभ्यताओं की सीमाओं को पार करती हुई हमें अज्ञानता के अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाती है। यह केवल शैक्षिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुभवजन्य, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक ज्ञान का भी समागम है।
प्राचीन काल से ही ज्ञान का महत्व समझा गया है। भारतीय उपमहाद्वीप में वेदों, उपनिषदों, और पुराणों के माध्यम से ज्ञान की दीप प्रज्वलित हुई। तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालों ने ज्ञान की धारा को विस्तार दिया और विश्वभर में प्रतिष्ठित हुए। भारतीय दर्शन, गणित, खगोलशास्त्र, और आयुर्वेद ने पूरी दुनिया को समृद्ध किया है।
ज्ञान की धारा में समय के साथ-साथ कई योगदानकर्ता जुड़ते गए। अरस्तु, प्लेटो, आइंस्टीन, न्यूटन और गाँधी जैसे महापुरूषों ने अपने-अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देकर ज्ञान की इस अंतहीन धारा को प्रवाहित किया। ज्ञान की इस यात्रा में पुस्तकों, शोधपत्रों, और वैज्ञानिक आविष्कारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आधुनिक युग में, तकनीकी उन्नति ने ज्ञान की धारा को और भी तीव्र और सुलभ बना दिया है। इंटरनेट और डिजिटल सूचना प्रणालियों के माध्यम से ज्ञान अब विश्व के किसी कोने में बैठा व्यक्ति भी आसानी से प्राप्त कर सकता है। ऑनलाइन पाठ्यक्रम, ई-पुस्तकालय, और वैज्ञानिक जर्नल्स ने शिक्षार्थियों को एक क्लिक में अपार ज्ञान तक पहुंचा दिया है।
ज्ञान की धारा केवल व्यक्तिगत विकास में सहायक नहीं होती, बल्कि समाज की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा और ज्ञान समाज में जागरूकता फैलाते हैं, जिससे सामाजिक समस्याओं का विवेकपूर्ण समाधान संभव हो पाता है।
अतः, ज्ञान की धारा निरंतर बहती रहनी चाहिए और इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। इसी में निहित है मानवता की सच्ची उन्नति और समृद्धि।