Comprehension Passage
भाषा भाव की वाहिका और विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। भाषा से ही किसी भी राष्ट्र की भावना एवं विचारों की सामर्थ्य का पता चलता है। भाषा ही राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोती है। प्रेमचंद ने साहित्य के बारे में यह बताया है कि साहित्य का उद्देश्य हमारी अनुभूतियों की तीव्रता को बढ़ाना है। साहित्य केवल मन बहलाने की चीज नहीं है। साहित्य जीवन की समस्याओं को भी सुनता है तथा उनका हल भी निकाल देता है। भाषा, भावना तथा विचारों का आपस में गहरा संबंध है। यह तीनों व्यक्ति के आधार हैं। भावों और विचारों का पोषण भाषा से ही होता है। इनसे हमारे व्यक्तित्व का निर्माण भी होता है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का समुचित विकास उसकी मातृभाषा में ही हो सकता है। मातृभाषा में जितनी सहज गति संभव है और इसमें जितनी कम शक्ति लगती है उतनी किसी विदेशी भाषा में संभव नहीं है। यदि हमारे देश के प्रतिभाशाली और होनहार व्यक्ति अपनी मातृभाषा में परिश्रम करके शक्ति, समय और तन्मयता से साहित्य रचना करते तो एक अद्भुत चमत्कार हो सकता था। माइकल मधुसूदन दत्त के दृष्टांत से यह बात स्पष्ट होती है। यदि इस प्रतिभावान व्यक्ति ने अंग्रेजी में काव्य रचना ना करके अपनी भाषा में काव्य रचना की होती तो वह प्रथम श्रेणी के कवि के रूप में प्रतिष्ठित हो सकते थे। अंग्रेजी में बहुत कुछ लिखकर भी द्वितीय श्रेणी के लेखक और कवि से अधिक न बन सके। श्रीमती सरोजिनी नायडू यदि अपनी मातृभाषा में काव्य रचना करतीं तो निश्चय ही सर्वश्रेष्ठ कवयित्री होने का गौरव प्राप्त करतीं। अंग्रेजी में काव्य रचना करके वे इस गौरव से वंचित रह गईं। राष्ट्रभाषा राष्ट्र की उन्नति की द्योतक होती है। राष्ट्रभाषा में विचार विनिमय सरल हो जाता है। राष्ट्रभाषा मानसिक उत्थान करती है। अपनी भाषा के बारे में गांधीजी का यह विचार था कि इसमें शिक्षा देने से कम समय सेअधिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। अपनी भाषा में आधे प्रयत्न से ही प्रवीणता आ जाती है। विदेशी भाषा के द्वारा शिक्षा पाने में दिमाग पर बोझ पड़ता है। इसकी भारी कीमत बच्चे को चुकानी पड़ती है। राष्ट्रभाषा के अभाव में मनुष्य केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, अपितु मानसिक रूप से भी दास बन जाता है। मानसिक दासता शारीरिक दासता से भयंकर होती है।
निम्नलिखित प्रश्न में, चार विकल्पों में से, उस विकल्प का चयन करें जो भाववाचक संज्ञा का सही विकल्प है।
1
दासता
2
शारीरिक
3
मानसिक
4
उपर्युक्त में एक से अधिक
5
उपर्युक्त में से कोई नहीं