नीचे एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।
जब-जब समाज पथभ्रष्ट हुआ है, तब-तब युग सर्जक की भूमिका का निर्वाह शिक्षकों ने बखूबी किया है। आज की दशा में भी जीवन मूल्यों की रक्षा के गुरुत्व दायित्व शिक्षक पर ही आ जाता है। वर्तमान स्थिति में जीवन मूल्यों के संस्थापन का भार शिक्षकों पर पहले की अपेक्षा अधिक हो गया है, क्योंकि आज का परिवार बालक के लिए सद़ुणों की पाठशाला जैसी संस्था नहीं रह गया है, जहाँ से बालक एक संतुलित व्यक्तित्व की शिक्षा पा सके। शिक्षक, विद्यालय परिसर में छात्र के लिए आदर्श होता है। शिक्षक के हर क्रिया कलाप पर छात्रों की दृष्टि रहती है। प्राथमिक स्तर के छात्र तो अपने शिक्षकों के निर्देश को ब्रह्काव्य मानकर उसका अनुसरण करते हैं। यहाँ तक कि अपने माता-पिता की तुलना में शिक्षकों को अभिमान देते हैं। इस वर्ग के छात्र किसी अन्य की बातों का उतना महत्व नहीं देते जितना कि अपने शिक्षकों की बातों को भी महत्वपूर्ण समझते हैं। प्राथमिक स्तर के छात्रों का चित्र निर्मल होता है। यही काल छात्रों में जीवन मूल्यों के संस्थापन का उत्तम का काल है। इस अवस्था में छात्रों के स्वच्छ निर्विकार मन पर शिक्षक जो भाव अंकित करना चाहे, कर सकते हैं। इस समस्या का मन पर पड़ने वाला प्रभाव स्थायी होता है। अतः इस शिक्षण कार्य में कार्यरत शिक्षकों को अपने छात्रों को छोटी-छोटी नीतिपरक कथाएं सुना कर उनमें जीवन मूल्यों का बीजारोपण करना चाहिए।