"अनुसन्धानी विद्वान् सत्य से पकड़ता है, और समझता है, सत्य सचमुच, उसकी गिरफ्त में है। मगर इतिहास का सत्य क्या हैं? घटनाएँ मरने के साथ फोसिल बनने लगती हैं, पत्थर बनने लगती हैं। दन्तकथा और पुराण बनने लगती हैं। बीती घटनाओं पर इतिहास अपनी झिलमिली में डाल देता है, जिससे वे साफ-साफ दिखायी न पड़े जिससे बुद्धि की ऊँगली उन्हें छूने से दूर रहे।"
उपर्युक्त कथन किस रचना की भूमिका से लिया गया है?
1
संस्कृति के चार अध्याय
2
अरे यायावर रहेगा याद
3
मेरी तिब्बत यात्रा
4
उपर्युक्त में से एक से अधिक
5
उपर्युक्त में से कोई नहीं