निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हम आपदाओं के दौर में जी रहे हैं। यह सच है कि इन आपदाओं को रोक पाना न तो इन्सान के बस में है न ही मशीनों के आपदाएँ मानव निर्मित हों या प्राकृतिक जिन्दगी में गहरा दर्द छोड़ जाती हैं। ज्यादातर आपदाएँ भौतिक नुकसान (अर्थव्यवस्था, भवन, सम्पत्ति सामाजिक व सांस्कृतिक) तो पहुँचाती ही है, लाखों जाने ले लेती हैं। प्रचलित प्राकृतिक आपदाओं में तूफान, बाढ़, बादल का फटना, भूकम्प, सुनामी, आग लगना आदि है जो मिनटों में मनुष्य के जीवन और सम्पत्ति को तबाह कर देते हैं। जाहिर है आपदाएँ तो आती ही रहेंगी लेकिन यदि हमने इन आपदाओं का समुचित प्रबंधन या नियंत्रण नहीं किया, तो स्थिति भयावह होगी। भारतीय संदर्भ में यदि हम प्राकृतिक आपदाओं की बात करें, तो आपदाओं से ज्यादा इसके समुचित प्रबंधन पर चर्चा करना जरूरी है। वर्ष 2001 में जब भीषण भूकम्प आया था तब सरकार ने घोषणा की थी कि देश में आपदा प्रबंधन को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा। आज 14 वर्षों बाद भी यदि यहाँ के आपदा प्रबंधन की तैयारियों को देखें तो कोई खास बदलाव नहीं दिखेगा जैसे सन् 2005 में जब भारत के दक्षिण-पश्चिमी तटबंधीय इलाके में सुनामी लहरों ने कहर बरपाया था। तब आपदा के बाद स्थिति को सम्भालने में हुए विलम्ब और लम्बे समय तक आपदाग्रस्त लोगों को सार्वजनिक परेशानी से यह समझा जा सकता है कि हमारा आपदा प्रबंध कितना मजबूत है। 1991 में उत्तरकाशी में आए भूकम्प के बाद से ही देश में एक मुकम्मल आपदा प्रबंधन नीति की मांग होती रही है। इस दिशा में यदि सरकार और स्वयंसेवी संगठनों की ओर से संयुक्त प्रयास हो, तो गति आ सकती है और जापान तथा अमेरिका की तर्ज पर भारत में एक मुकम्मल और प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था बनाई जा सकती है। बेहतर आपदा प्रबंधन के लिए हमें दो शब्दों को बराबर ध्यान में रखना चाहिए ये हैं जानकारी और बचाव। किसी भी आपदा या आकस्मिकता से बचाव में 'जानकारी' अहम भूमिका निभा सकती है। जानकारी यानि आपदाएँ क्या हैं, कितने प्रकार की होती हैं, कैसे आती हैं, कब आती हैं, किस तरह का नुकसान करती है आदि । जाहिर है विज्ञान के एक सामान्य विद्यार्थी की तरह यदि हम आपदाओं के संबंध में क्या, क्यों कब, कैसे यदि सवाल और उसके उत्तर जान लें, तो आपदा प्रबंध सहज हो जाएगा। हम यहाँ विशेष तौर पर आपदा और उसके प्रबंधन की बात कर रहे हैं। इसलिए आपदा से जुड़े क्या, क्यों, कब और कैसे की जानकारी ज्यादा लाभकर रहेगी। एक प्रभावी आपदा प्रबंध नीति और व्यवस्था के लिए जरूरी है कि वैश्विक एक देश के स्तर पर आपदा संबंधी स्थिति सूचनाएँ एवं भविष्यवाणियों की पहले समीक्षा कर ली जाए। आपदा संबंधी भविष्यवाणियों की समीक्षा के लिए सर्वाधिक आवश्यक है: यूएनडीपी की रिपोर्ट पर गौर करना।