Comprehension Passage
चीन में सन् 630 के पतझड़ का मौसम था, हुएनत्सांग खुशी से सराबोर होकर सुमेरु पर्वत को देख रहे थे। उन्हें लगा कि देवी पर्वत सुमेरु महान समुद्र के मध्य में से उभरा। सुमेरु पर्वत सोना, चांदी, रत्नों और जवाहरातों का बना हुआ सुंदर एवं विशाल पर्वत लग रहा था। उन्होंने उस पर चढ़ना चाहा, लेकिन उनके चारों ओर सागर की ऊँची भयंकर लहरों ने उनकी कोशिश नाकामयाब कर दी। उस समय वहाँ कोई जहाज एवं नौका भी नहीं दिखाई दे रही थी। हुएनत्सांग बिना किसी डर के लहरों को पार करते रहे। ठीक उसी समय उनके पैरों के समीप पाषाण-कमल उदित हुआ। जैसे ही वे कमल पर पैर रखते, कमल गायब होकर और दुबारा उनके सामने प्रकट होता इस तरह वे पाषाण कमल पर पैर रखते हुए उस पवित्र पर्वत तक पहुंच गए। लेकिन वे उसकी चोटी पर न चढ़ सके। जैसे ही उन्होंने साहस बटोरकर कदम आगे बढ़ाने की कोशिश की, वैसे ही एक तेज बवंडर ने आकर उन्हें उठाकर पर्वत की सबसे ऊँची चोटी पर पहुँचा दिया।

गद्यांश का उचित शीर्षक क्‍या है?

1
हुएनत्सांग की भारत यात्रा
2
हुएनत्सांग की पर्वत यात्रा
3
सुमेरु पर्वत
4
उपर्युक्त में से एक से अधिक
5
उपर्युक्त में से कोई नहीं

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