निर्देश: नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
मिलन और विछोह, जीवन के दो अभिन्न पहलू हैं, जिन्हें हर इंसान ने अपने जीवन में किसी न किसी रूप में अनुभव किया है। मिलन की अनुभूति सुखद और उल्लासपूर्ण होती है, जो हमारे ह्रदय को अपार आनंद और समर्पण से भर देती है। यह वह क्षण होता है जब हम अपने प्रियजनों से मिलते हैं, अपने दोस्तों के साथ अच्छे समय बिताते हैं, या अपने सपनों को साकार होते देखते हैं। मिलन हमें अपनी संपूर्णता का एहसास कराता है, हमें अपनी ताकत और साथ मिलकर काम करने की शक्ति को पहचानने का अवसर देता है।
मिलन का सबसे अच्छा उदाहरण परिवार के सदस्यों का एक साथ आना है, त्यौहारों पर पूरा परिवार जब एक साथ होता है, तो हर घर एक अद्वितीय ऊर्जा और खुशी से भर जाता है। शादी के मौके, जन्मदिन की पार्टियाँ, और त्योहारों की खुशियों के पल हमें यह एहसास दिलाते हैं कि मिलन ही जीवन की असली खूबसूरती है। प्रेमी युगल का मिलन, वर्षों बाद किसी मित्र से पुनर्मिलन, ये सभी घटनाएं हमारे जीवन में खुशियों का आगमन करती हैं और हमें यह एहसास दिलाती हैं कि संबंधों में ही सच्ची खुशी बसती है।
परंतु, जीवन में मिलन के साथ-साथ विछोह भी आता है, जिससे हम चाहकर भी बच नहीं सकते। विछोह का दर्द संवेदनशील और गहरा होता है, जो हमारे ह्रदय को व्यथित और अशांत कर देता है। यह वह पल होता है जब हमें किसी प्रियजन से बिछुड़ना पड़ता है, किसी अपने की यादें हमें तड़पाती हैं, या किसी सपने का टूट जाना हमें निराश कर देता है। विछोह हमें जीवन की अनिश्चितता और नश्वरता का एहसास कराता है।
विछोह के सबसे आम उदाहरणों में प्रियजनों का दूर जाना, किसी अपने का निधन, या मित्रों का बिछड़ना शामिल है। यह पीड़ा उस समय और बढ़ जाती है जब हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर नहीं मिलता। परंतु वही विछोह हमें धैर्य, सहनशीलता और समय की महत्त्वता का पाठ भी पढ़ाता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है और परिवर्तन ही जीवन का स्थायी नियम है।
मिलन और विछोह, दोनों ही जीवन के दो पहलू हैं जो हमें संतुलन और सामंजस्य के साथ जीना सिखाते हैं। इन दोनों के अनुभव से हम अधिक संवेदनशील, सहानुभूति और समझ से भरपूर इंसान बनते हैं। इन्हीं अनुभवों से हमारी भावनाएँ प्रबल होती हैं और जीवन की वास्तविकता का बोध होता है। इसलिए, हमें मिलन के सुखद पलों को संजोकर रखना चाहिए और विछोह की पीड़ा को सीख और अनुभव के रूप में स्वीकार करना चाहिए। इसी से हमारा जीवन सम्पूर्ण और सार्थक बनता है।