एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पो में से सही विकल्प चुने।
'मैला आँचल' हिन्दी का प्रतिनिधि आंचलिक उपन्यास है और इस कारण इसके कथ्य में प्रायः वे सारी विशेषताएँ मिलती है, जो किसी भी आंचलिक उपन्यास में पाई जाती है। आंचलिक उपन्यास में जो परिवेश लिया जाता है, वह समय और स्थान के जीवन के जितने पक्ष हो सकते हैं, उन पक्षों के जितने चेहरे हो सकते हैं, वे सब उसमें पूरे विस्तार के साथ विद्यमान होते हैं। मैला आँचल भी ऐसे ही कथ्य को धारण करता है।
मैला आँचल' में 'मेरीगंज' गाँव की विस्तृत तथा समग्र कथा को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि अँचल ही नायक बन गया है। इस उपन्यास का उद्देश्य अँचल की समस्याओं को प्रकाशित करने का ही रहा है, हालाँकि उद्देश्य रचना प्रक्रिया में घुला हुआ है। इसमें अँचल की सुन्दरता व कुरूपता दोनों का गहरा चित्रण किया गया है। इसमें जातिवाद, अफसरशाही, अवसरवादी राजनीति, मठों और आश्रमों का पाखण्ड भी दिखाया गया है। रेणु जी का मैला आँचल वस्तु और शिल्प दोनों स्तरों पर सबसे अलग है। इसमें एक नए शिल्प में ग्रामीण जीवन को दिखाया गया है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका नायक कोई व्यक्ति नहीं है, अपितु पूरा का पूरा अँचल ही इसका नायक है। दूसरी प्रमुख बात यह है कि मिथिलांचल की पृष्ठभूमि पर रचे इस उपन्यास में उस अँचल की भाषा विशेष का अधिक से अधिक प्रयोग किया गया है और यह प्रयोग इतना सार्थक है कि वह वहाँ के लोगों की इच्छा-आकांक्षा, रीति-रिवाज, पर्वत्यौहार, सोच-विचार को पूरी प्रामाणिकता के साथ पाठक के सामने उपस्थित करता है।
'रेणु' का 'मेरीगंज' गाँव जीवन्त रूप में हमारे सामने है, जिसमें वहाँ के लोगों का हँसी-मज़ाक, प्रेम-घृणा, सौहार्द्र-वैमनस्य, ईर्ष्या-द्वेष, संवेदना-करुणा, सम्बन्ध शोषण आदि को पूरे उतार-चढ़ाव के साथ उकेरा गया है। इसमें जहाँ एक ओर नैतिकता के प्रति तिरस्कार का भाव है, तो वहीं दूसरी ओर नैतिकता के लिए छटपटाहट भी है। साथ ही परस्पर विरोधी मान्यताओं के बीच कहीं-न-कहीं जीवन के प्रति गहरी आस्था भी है।