निर्देश: नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
मातृभूमि की रक्षा का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर एक ऐसे देश में जहां विविधता और संस्कृतियों की संपन्नता है। भारत, प्रकृति की गोद से सुसज्जित, एक अद्वितीय राष्ट्र है जहां विविधता में एकता है। यहाँ विभिन्न धर्म, भाषाएं और सांस्कृतिक परंपराएं अद्भुत सौंदर्य और समृद्धि को दर्शाती हैं। इस मातृभूमि की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है, जो हर भारतीय के हृदय में बसे महान आदर्शों और मूल्यवान विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
रक्षा का अर्थ केवल बाहरी आक्रमण से नहीं है, बल्कि यह आंतरिक सुरक्षा और समृद्धि के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बाहरी दुश्मनों के खतरे से बचाव के लिए हमारे वीर सैनिक सीमाओं पर निडरता से डटे रहते हैं। वे अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा करते हैं, ताकि प्रत्येक नागरिक सुरक्षित रह सके। सैनिकों का यह बलिदान हमें याद दिलाता है कि हमारे पास जो स्वतंत्रता और सुरक्षा है, वह कितनी मूल्यवान है और इसे बनाए रखने के लिए हमें कितना सतर्क रहना होगा।
आंतरिक रूप से, देश की रक्षा का मतलब है सामाजिक सद्भाव बनाए रखना, कानून और व्यवस्था का पालन करना, और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना। भ्रष्टाचार, असमानता, और गरीबी जैसी आंतरिक चुनौतियों से निपटना भी हमारी जिम्मेदारी है। इन चुनौतियों का सामना करके ही हम एक मजबूत और समृद्ध भारत की नींव रख सकते हैं।
इसके अलावा, पर्यावरण की रक्षा भी मातृभूमि की रक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करते हैं, तो हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करते हैं। प्रदूषण को कम करके, वनों की कटाई रोककर, और जल के स्रोतों की सुरक्षा का ध्यान रखकर, हम अपनी भूमि को संरक्षित रखते हैं।
मातृभूमि की रक्षा में सभी नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने देश के प्रति वफादार रहे और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखे। शिक्षा, सेवा, और सतर्कता के माध्यम से हम अपनी भूमिपर अमिट निशान छोड़ सकते हैं। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने देश को हर संकट से बचाएं और इसे प्रगति की ओर ले जाएं।
अतः, मातृभूमि की रक्षा हम सभी का परम धर्म और कर्तव्य है। इसे सुरक्षित और समृद्ध रखना हमारे बच्चों के भविष्य के लिए भी आवश्यक है। जब हम अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे और निभाएंगे, तभी हम एक मजबूत और सक्षम राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।