निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दें।
‘‘धरती धन न अपना’ जगदीशचंद्र का लिखा एक उपन्यास है जो मूलतः पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित है किन्तु आज पूरे देश में व्याप्त है। गाँव में एक ऐसा वर्ग है जिसके पास न अपनी धरती है, न अपना मकान, न कोई धन। वह उन लोगों की कृपा पर पल रहा है जिनके पास अपनी जमीनें हैं। ऐसे ही जमीन वाले लोगों के यहाँ मेहनत– मजदूरी करके ये लोग अपना गुजारा करते हैं।
इस उपन्यास का नायक नौकरी करने शहर गया है और चाची की याद उसे वापस गाँव खींच लाती है। उसे पता भी नहीं है कि उसकी चाची ज़िंदा भी है या मर गई। जब घर पहुँचता है तो दूर से ही चाची की खांसने की आवाज से पता चल जाता है कि बुढ़िया अभी जिन्दा है।
इस उपन्यास में अस्पृश्यता की समस्या को दूसरी तरह से उठाया गया है। गाँव में बाढ़ आ जाने पर सबसे ज्यादा खतरा इसी बस्ती को है क्योंकि इनके घर कच्चे हैं जिन्हें नदी की बाढ़ नुकसान पहुँचा सकती है। इनके कुएँ में नदी का पानी भर जाने के कारण उसका पानी पीने योग्य नहीं रहा और दूसरा कुआँ उच्च वर्ग का है। गाँव के इन निम्न वर्गीय लोगों को जमीन वाले लोग जबरदस्ती नदी का बाँध बाँधने की मजदूरी पर लगा देते हैं और मजदूरी भी नहीं देते। अंततः जब मरने की नौबत आ जाती है तो इन गरीब लोगों को ही झुकना पड़ता है। इस प्रकार, इस रचना में प्रगतिवादी चेतना का समावेश परिलक्षित है।’