निर्देशः नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“किसी भी देश के लिए स्वतंत्रता वरदान होती है। स्वतंत्र देश संस्कार तो देता ही है। आत्मनिर्भर भी बनाता है। आज़ादी हमें आस्था देती है। आत्मविश्वास हमें मर्यादापूर्वक जीवन जीने की कला सिखाता है। बड़ों का सम्मान छोटों के प्रति स्नेह और आत्मीयता, उनके प्रति जिम्मेदारी का बोध हमारी मर्यादा के अंग बना जाते हैं। हमें आकांक्षाओं की तुलना में अपनी योग्यताएँ बढ़ानी चाहिए। नम्रता हमारी जीवन-शैली के प्रेरक बनते हैं। हमारे महापुरुषों ने अनेक कष्ट सहे। यातनाएँ सही पर अनैतिकता से समझौता नहीं किया। वे दृढ़ निश्चयी थे, संकल्पबद्ध थे। प्रलोभनों और आकांक्षाओं के गुलाम नहीं थे। उन्होंने मानसिक स्वतंत्रता, निर्द्वंद्वता और आत्मनिर्भरता के कारण ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। हमें अवसरों की राह नहीं देखनी, अवसरों की राह बनानी है। महानता, सार्थकता, उद्देश्यपूर्णता को हम यदि संस्कार बना लें तो सफलता निश्चित है।”