"उन्होंने 'निज भाषा' शब्द का व्यवहार किया है, 'मिली-जुली', 'आमफहम', 'राष्ट्रभाषा' आदि शब्दों का नहीं। प्रत्येक जाति की अपनी भाषा है और वह निज भाषा की उन्नति के साथ उन्नत होती है।"
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का यह कथन किस विद्वान् के प्रति है?
1
चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'
2
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
3
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
4
उपर्युक्त में से एक से अधिक
5
उपर्युक्त में से कोई नहीं