निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
संसार एक रणक्षेत्र है। इस मैदान में उसी सेनापति को विजय लाभ होता है, जो अवसर को पहचानता है। वह अवसर पर जितने उत्साह से आगे बढ़ता है, उतने ही उत्साह से आपत्ति के समय पीछे हट जाता है। वह वीर पुरुष राष्ट्र का निर्माता होता है और इतिहास उसके नाम पर यश के फूलों की वर्षा करता है। पर इस मैदान में कभी-कभी ऐसे सिपाही भी जाते हैं, जो अवसर पर कदम बढ़ाना जानते हैं; लेकिन संकट में पीछे हटना नहीं जानते। ये रणवीर पुरुष विजय को नीति की भेंट चढ़ा देते हैं। वे अपनी सेना का नाम मिटा देंगे, किंतु जहाँ एक बार पहुँच गए हैं वहाँ से कदम पीछे न हटाएँगे। उनमें कोई बिरला ही संसार क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है; किंतु प्राय: उसकी हार विजय से भी अधिक गौरवात्मक होती है। अगर अनुभवशील सेनापति राष्ट्रों की नींव डालता है, तो आन पर जान देने वाले, मुँह न मोड़ने वाला सिपाही राष्ट्र के भावों को उच्च करता है, और उसके हृदय पर नैतिक गौरव को अंकित कर देता है।