निम्नलिखित अनुच्छेद के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिये-
'भक्ति का क्षेत्र, भावना अथवा ह्रदय है तथा राष्ट्रवाद का सम्बन्ध बुद्धि से है। अतः देशभक्ति देश के प्रति एक प्रकार का अनुराग है और राष्ट्रवाद मष्तिष्क के तर्क से उत्पन्न विचार। राष्ट्रवाद के मूल में देशभक्ति, बीज रूप में सुरक्षित रहती है। अनेक अन्य प्रकार की भक्ति की भाँति ही, देश की रज के प्रति भक्ति की भावना भी है। प्रारम्भ में मनुष्य की भक्ति तथा ममत्व की भावना जन्मभूमि तक सीमित थी, किन्तु शनैः-शनैः उसका विस्तार राज्य की सीमा में बढ़ा। शिक्षा के प्रसार तथा यातायात की सुविधाओं के साथ मनुष्य का परिचय एक बड़े भूखंड के अन्य भागों से भी हुआ। सामान्य विशेषताओं, रीति-रिवाज़ और संस्कृति की एकता के आधार पर आपस में सम्बन्ध स्थापित हुए। इसी प्रकार आज देशभक्ति की भावना जिस विस्तृत रूप में संसार के सम्मुख आई है, वैसी इसके पहले कभी न थी। आज हम अपने पूरे देश या राष्ट्र को जन्मभूमि की संज्ञा देते हैं। जन्मभूमि का अर्थ स्वदेश है, जिसके प्रति रागात्मक वृत्ति सजग रहती है। सामंतवादी समाज-व्यवस्था में व्यक्ति की भावना के क्षेत्र में केवल छोटे-छोटे राज्य थे। उनकी देशभक्ति शासन के प्रति मोह तक सीमित थी।'