निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
'प्रेम मार्गी शाखा के प्रमुख कवि मलिक मोहम्मद जायसी संसार से इतने विरक्त नहीं थे। वह लोक तथा परलोक दोनों की साधना चाहते थे। उन्होंने अपने 'पद्मावत' में मसनवी परंपरा के अनुकूल शेरशाह की वंदना की है, जो हुमायूँ को हराकर दिल्ली की गद्दी पर बैठा था। वह बहुत वीर योद्धा था। प्रेम की भावना बहुत प्रबल होने के कारण, उन्होंने प्रेम को ईश्वर का पीर माना। उन्होंने अलौकिक प्रेम गाथाओं के रूपक द्वारा परमार्थिक प्रेम की साधना की है। पद्मावती की प्रेम कथा, जो पृथ्वीराज रासो में वीर रस से आश्रित गौण सी है, वह जायसी के 'पद्मावत' में मुख्यतः प्राप्त होती है। पद्मावत में कथा भी है और रूपक के द्वारा अलौकिक तत्वों की व्यंजना भी है। जायसी भारतीय संस्कृति से पूर्णतः परिचित थे। थोड़े-बहुत हेर-फेर के साथ उनके काव्य में भारतीय अंतर-कथाओं और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख हुआ है। उसमें रासो की अपेक्षा अन्विति अधिक है और आरंभ से लेकर अंत तक उनकी शैली और भाषा की एकरसता है। पद्मावत प्रबंध काव्य का एक अच्छा उदाहरण कहा जा सकता है क्योंकि इस काव्य में प्रेम पर आधारित अनेक लोगों की कथाओं का वर्णन किया गया है।'