सुख दुख के मधुर मिलन से
यह जीवन हो परिपूरन;
फिर घन में ओझल हो शशि
फिर शशि से ओझल हो घन।
इन पंक्तियों में काव्य गुण है -
1
ओज
2
माधुर्य
3
प्रसाद
4
ओज-प्रसाद
सुख दुख के मधुर मिलन से
यह जीवन हो परिपूरन;
फिर घन में ओझल हो शशि
फिर शशि से ओझल हो घन।
इन पंक्तियों में काव्य गुण है -