आवेगों से विपुल विकला शीर्ण शैया कृशांगी ।
चिन्ता दग्धा व्यथित हृदया शुष्क ओष्ठा अधीरा ।।
इन पंक्तियों में छंद है -
1
मन्दाक्रान्ता
2
मत्तगयंद सवैया
3
मालिनी
4
वंशस्थ
आवेगों से विपुल विकला शीर्ण शैया कृशांगी ।
चिन्ता दग्धा व्यथित हृदया शुष्क ओष्ठा अधीरा ।।
इन पंक्तियों में छंद है -