दिवस का अवसान समीप था,
गगन था कुछ लोहित हो चला।
तरुशिखा पर थी अब राजती,
कमलिनी-कुल-बल्लभ की प्रभा।
इस पद में कौन-सा छंद है?
1
वसन्त तिलका
2
द्रुतविलम्बित
3
शिखरिणी
4
उपेन्द्रवज्रा
दिवस का अवसान समीप था,
गगन था कुछ लोहित हो चला।
तरुशिखा पर थी अब राजती,
कमलिनी-कुल-बल्लभ की प्रभा।
इस पद में कौन-सा छंद है?